(N/A) संधारित्र को दी गई तात्क्षणिक शक्ति इस प्रकार है:
$p = v \cdot i$
मान लीजिए संधारित्र के सिरों पर वोल्टेज $v = V_m \sin(\omega t)$ है।
शुद्ध संधारित्र परिपथ में धारा वोल्टेज से $\pi/2$ आगे होती है,इसलिए $i = I_m \sin(\omega t + \pi/2) = I_m \cos(\omega t)$।
अतः,तात्क्षणिक शक्ति है:
$p = (V_m \sin(\omega t)) \cdot (I_m \cos(\omega t))$
$p = V_m I_m \sin(\omega t) \cos(\omega t)$
सर्वसमिका $\sin(2\theta) = 2 \sin \theta \cos \theta$ का उपयोग करने पर:
$p = \frac{V_m I_m}{2} \sin(2\omega t)$
एक पूर्ण चक्र पर औसत शक्ति $P$,एक आवर्तकाल $T = 2\pi/\omega$ पर तात्क्षणिक शक्ति का औसत है:
$P = \langle p \rangle = \frac{V_m I_m}{2} \langle \sin(2\omega t) \rangle$
चूंकि एक पूर्ण चक्र पर $\sin(2\omega t)$ का औसत मान शून्य होता है,इसलिए शुद्ध संधारित्र परिपथ में व्यय औसत शक्ति है:
$P = 0$
यह दर्शाता है कि एक संधारित्र $AC$ परिपथ में किसी भी वास्तविक शक्ति का उपभोग नहीं करता है; यह केवल ऊर्जा को संग्रहीत और मुक्त करता है।