(N/A) फ्लोरीन निम्नलिखित कारणों से असामान्य व्यवहार प्रदर्शित करता है:
$(i)$ छोटा परमाणु आकार।
$(ii)$ उच्च आयनन एन्थैल्पी।
$(iii)$ संयोजकता कोश में $d$-कक्षकों की अनुपस्थिति।
$(iv)$ उच्च धनात्मक इलेक्ट्रोड विभव।
असामान्य व्यवहार के मुख्य बिंदु:
$1$. फ्लोरीन केवल $(-1)$ ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है,जबकि अन्य हैलोजन $(+1), (+3), (+5)$ और $(+7)$ ऑक्सीकरण अवस्थाएं प्रदर्शित करते हैं।
$2$. अंतर-आणविक $H$-आबंधन के कारण $HF$ द्रव है,जबकि $HCl, HBr$ और $HI$ गैसीय अवस्था में होते हैं।
$3$. संयोजकता कोश में $d$-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण फ्लोरीन $F_{3}^{-}$ जैसे पॉलीहेलाइड आयन नहीं बनाता है।
$4$. फ्लोरीन केवल एक ही ऑक्सोअम्ल $(HOF)$ बनाता है,जबकि अन्य हैलोजन कई ऑक्सोअम्ल बनाते हैं।
$5$. $d$-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण फ्लोरीन की अधिकतम सहसंयोजकता $1$ है,जबकि अन्य हैलोजन $7$ तक की सहसंयोजकता प्रदर्शित कर सकते हैं।
$6$. हाइड्रोफ्लोरिक अम्ल $(HF)$ डाइमर $(H_{2}F_{2})$ के रूप में मौजूद होता है और द्विभास्मिक (dibasic) अम्ल के रूप में कार्य करता है,जबकि अन्य हाइड्रोहेलिक अम्ल एकभास्मिक (monobasic) होते हैं।
$7$. $F-F$ बंध की कम बंध वियोजन एन्थैल्पी के कारण $F_{2}$ अत्यधिक अभिक्रियाशील है।
$8$. फ्लोरीन सल्फर के साथ $SF_{6}$ जैसे स्थिर हेक्साफ्लोराइड बनाता है,जबकि अन्य हैलोजन ऐसे स्थिर हेक्साहैलाइड नहीं बनाते हैं।