(N/A) किसी भी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी नियमित रूप से घटती है।
इस प्रवृत्ति को निम्नलिखित कारकों द्वारा समझाया गया है:
$(i)$ परमाणु आकार: ऊपर से नीचे जाने पर,प्रत्येक क्रमिक तत्व पर एक नए मुख्य ऊर्जा कोश के जुड़ने के कारण परमाणु आकार बढ़ता है। यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों और नाभिक के बीच की दूरी को बढ़ाता है,जिससे आकर्षण बल कम हो जाता है,और आयनन एन्थैल्पी घट जाती है।
$(ii)$ परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect): नए कोशों के जुड़ने से परिरक्षण प्रभाव बढ़ता है,जो संयोजी इलेक्ट्रॉनों द्वारा अनुभव किए जाने वाले प्रभावी नाभिकीय आवेश को कम करता है,जिससे आयनन एन्थैल्पी में कमी आती है।
$(iii)$ नाभिकीय आवेश: हालांकि परमाणु क्रमांक के साथ नाभिकीय आवेश बढ़ता है,लेकिन परमाणु आकार में वृद्धि और स्क्रीनिंग प्रभाव का संयुक्त प्रभाव बढ़े हुए नाभिकीय आवेश की भरपाई कर देता है। परिणामस्वरूप,संयोजी इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा कम मजबूती से बंधे होते हैं और समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती जाती है।
तुलना: समूह-$1$ के तत्वों (क्षार धातुएं) की आयनन एन्थैल्पी अपने संबंधित आवर्तों में सबसे कम होती है क्योंकि उनका परमाणु आकार सबसे बड़ा होता है। समूह-$17$ के तत्वों (हैलोजन) की आयनन एन्थैल्पी अपने संबंधित आवर्तों में सबसे अधिक होती है,जिसका कारण उनका छोटा परमाणु आकार और उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश है।