(N/A) ड्यूमा विधि में,नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक यौगिक की ज्ञात मात्रा को कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ के वातावरण में कॉपर ऑक्साइड $(CuO)$ की अधिकता के साथ गर्म किया जाता है,जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के अलावा मुक्त नाइट्रोजन $(N_2)$ उत्पन्न होता है।
रासायनिक समीकरण: $C_xH_yN_z + (2x + y/2)CuO \to xCO_2 + y/2H_2O + z/2N_2 + (2x + y/2)Cu$
उत्पन्न नाइट्रोजन ऑक्साइड को गर्म कॉपर गेज से गुजारकर नाइट्रोजन गैस में अपचयित किया जाता है। $N_2$ गैस को पोटेशियम हाइड्रोक्साइड $(KOH)$ के जलीय घोल पर एकत्र किया जाता है और उसका आयतन मापा जाता है।
जेल्डाल विधि में,कार्बनिक यौगिक को सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड $(H_2SO_4)$ के साथ गर्म किया जाता है। नाइट्रोजन को अमोनियम सल्फेट $((NH_4)_2SO_4)$ में परिवर्तित किया जाता है। इसे फिर सोडियम हाइड्रोक्साइड $(NaOH)$ के साथ आसवित किया जाता है। मुक्त हुई अमोनिया $(NH_3)$ को $H_2SO_4$ के ज्ञात आयतन में प्रवाहित किया जाता है।
अभिक्रियाएं: $Organic \text{ } compound \xrightarrow{Conc. H_2SO_4} (NH_4)_2SO_4$
$(NH_4)_2SO_4 + 2NaOH \to Na_2SO_4 + 2NH_3 + 2H_2O$
$2NH_3 + H_2SO_4 \to (NH_4)_2SO_4$
बचे हुए एसिड को अनुमापन द्वारा मापकर अमोनिया की मात्रा निर्धारित की जाती है। यह विधि वलय संरचना वाले नाइट्रोजन या नाइट्रो $(-NO_2)$ और एज़ो $(-N=N-)$ समूह वाले यौगिकों के लिए लागू नहीं होती है।