(A-E) अस्थमा (दमा): यह एक एलर्जी संबंधी बीमारी है। श्वासनली की दीवार की मांसपेशियां उत्तेजित रहती हैं और उनमें लगातार संकुचन होता है। हवा में मौजूद एलर्जी कारक इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। अस्थमा में श्वसनी और श्वसनिकाओं में सूजन के कारण सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट होती है।
$(B)$ वातस्फीति (Emphysema): यह फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी है। इस बीमारी में वायुकोष (alveoli) अपनी लचीलापन खो देते हैं। परिणामस्वरूप,उच्छवास के बाद भी वायुकोष हवा से भरे रहते हैं। यह मुख्य रूप से सिगरेट पीने और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के कारण होता है।
$(C)$ ब्रोंकाइटिस: यह श्वसनी की सूजन है। यह धूम्रपान और संक्रमण के कारण होता है। इसमें लगातार खांसी देखी जाती है।
$(D)$ निमोनिया: यह जीवाणु संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। वायुकोष तरल पदार्थ और मृत श्वेत रक्त कोशिकाओं से भर जाते हैं। यह बच्चों,वृद्धों और $AIDS$ के रोगियों में अधिक खतरनाक होता है।
$(E)$ व्यावसायिक श्वसन विकार: ये किसी के व्यवसाय के कारण होते हैं। गैसें और धूल के कण इसके प्रमुख कारक हैं। सिलिकोसिस और एस्बेस्टोसिस इसके सामान्य उदाहरण हैं। कुछ उद्योगों में,विशेष रूप से पत्थर तोड़ने या पीसने वाले उद्योगों में,इतनी धूल पैदा होती है कि शरीर की रक्षा प्रणाली पूरी तरह से इसका सामना नहीं कर पाती है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से सूजन हो सकती है,जिससे फाइब्रोसिस (तंतुमय ऊतकों का प्रसार) होता है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। ऐसे उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों को सुरक्षात्मक मास्क पहनना चाहिए।