(N/A) $\rightarrow$ मक्का की पत्ती चपटी और लंबी होती है। मध्य पत्ती में उत्पन्न कोशिकाएं एक ही प्रकार की होती हैं। इसलिए संरचनात्मक रूप से मक्का की पत्ती को समद्विपार्श्व (Isobilateral) पत्ती कहा जाता है।
$\rightarrow$ मक्का की पत्ती के पतले खंड को सैफ्रानिन से अभिरंजित करके सूक्ष्मदर्शी के नीचे देखने पर निम्नलिखित परतें दिखाई देती हैं: $(1)$ बाह्यत्वचा (Epidermis),$(2)$ पर्णमध्योतक (Mesophyll tissue),$(3)$ संवहन बंडल (Vascular bundles)।
$(1)$ बाह्यत्वचा: पत्ती में दो बाह्यत्वचा दिखाई देती हैं।
$\rightarrow$ ऊपरी बाह्यत्वचा: यह सबसे ऊपरी परत या अक्षीय (adaxial) परत बनाती है। यह मृदूतकीय कोशिकाओं से बनी एक स्तरीय ऊतक है। इसकी बाहरी सतह क्यूटिकल की सुरक्षात्मक परत से ढकी होती है।
$\rightarrow$ अक्षीय परत में कुछ दूरी पर बुलीफॉर्म कोशिकाएं लंबी पंक्तियों में व्यवस्थित होती हैं। ये कोशिकाएं $5$ से $7$ के समूह में होती हैं।
$\rightarrow$ ये कोशिकाएं बाह्यत्वचा की अन्य कोशिकाओं की तुलना में अपेक्षाकृत बड़ी होती हैं। उनकी बाहरी दीवार पर सुरक्षात्मक क्यूटिकल नहीं होता है और यह बहुत पतली होती है। आमतौर पर इन कोशिकाओं के दोनों ओर एककोशिकीय तिरछे छोटे रोम (trichomes) स्थित होते हैं। ये रोम वातावरण से नमी को निर्देशित करते हैं,इसलिए इन्हें नमी-अवशोषक रोम कहा जाता है।
$\rightarrow$ बुलीफॉर्म कोशिकाओं की उपस्थिति अक्षीय परत को पराक्षीय (abaxial) परत से अलग करती है। आर्द्र वातावरण में बुलीफॉर्म कोशिकाएं पानी सोखकर स्फीत (turgid) हो जाती हैं और पत्ती की सतह खुल जाती है। शुष्क वातावरण में पानी की कमी के कारण वे श्लथ (flaccid) हो जाती हैं,जिससे पत्तियां पानी के नुकसान को कम करने के लिए अंदर की ओर मुड़ जाती हैं। इस प्रकार,ये कोशिकाएं पत्ती को मोड़ने का कार्य करती हैं,इसलिए इन्हें मोटर कोशिकाएं भी कहा जाता है। नमी अवशोषक या बुलीफॉर्म कोशिकाएं गोल और बुलबुले जैसी होती हैं,इसलिए इन्हें बुलीफॉर्म कोशिकाएं कहा जाता है।
$(2)$ पर्णमध्योतक ऊतक: पत्ती समद्विपार्श्व संरचना रखती है,इसलिए पर्णमध्योतक ऊतक में खंभ ऊतक (palisade) और स्पंजी ऊतक जैसा कोई विभेदन नहीं होता है।
$\rightarrow$ सभी कोशिकाएं एक समान होती हैं और उनमें समान मात्रा में क्लोरोप्लास्ट होते हैं।
$\rightarrow$ मक्का की पत्ती में दोनों बाह्यत्वचा के बीच केवल खंभ ऊतक जैसी कोशिकाएं स्थित होती हैं। ये कोशिकाएं गोल या अंडाकार होती हैं। कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय स्थान होता है। रंध्रों के नीचे हवा से भरी थैलियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं,जिन्हें श्वसन गुहा कहा जाता है।
$(3)$ संवहन बंडल: मक्का एक एकबीजपत्री पौधा है,जिसकी पत्ती में समानांतर शिराविन्यास होता है; इसलिए संवहन बंडल लंबवत कटे हुए दिखाई देते हैं। वे एक-दूसरे से समान दूरी पर स्थित होते हैं।
$\rightarrow$ संवहन बंडल संयुक्त,संपार्श्विक (collateral) और बंद प्रकार के होते हैं।
$\rightarrow$ संवहन बंडल बड़े और छोटे दोनों प्रकार के होते हैं। संवहन बंडल में जाइलम अक्षीय परत की ओर और फ्लोएम ऊतक पराक्षीय परत की ओर स्थित होता है।
$\rightarrow$ संवहन बंडल दृढ़ोतक (sclerenchymatous) बंडल आच्छद से घिरा होता है। यह बंडल आच्छद अक्षीय और पराक्षीय परत तक विकसित होता है,जिससे संवहन बंडल पत्तियों को मजबूती प्रदान करते हैं।