(N/A) $1886$ और $1902$ के बीच,हॉलवाच और लेनार्ड ने प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन की घटना का अध्ययन किया।
लेनार्ड का प्रयोग:
चित्र में दिखाए अनुसार,एक निर्वातित कांच की नली के अंदर दो धातु के इलेक्ट्रोड विपरीत सिरों पर रखे जाते हैं। एक इलेक्ट्रोड को कैथोड $(C)$ (उत्सर्जक) कहा जाता है,जो एक प्रकाश-संवेदी सतह है और दूसरे इलेक्ट्रोड को संग्राहक $(A)$ कहा जाता है। $C$ और $A$ के बीच विभवांतर लगाया जाता है।
इस नली में एक क्वार्ट्ज खिड़की दी गई है जिसके माध्यम से पराबैंगनी किरणें कैथोड $(C)$ पर आपतित होती हैं।
जब पराबैंगनी विकिरण कैथोड $(C)$ पर आपतित होता है,तो सतह से फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
एनोड $(A)$ को कैथोड $(C)$ के सापेक्ष धनात्मक वोल्टेज पर रखा जाता है,इसलिए यह उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करता है,जिससे इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह होता है। परिणामस्वरूप,परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होती है।