(N/A) मान लीजिए कि $m$ चुंबकीय आघूर्ण और $2l$ लंबाई वाली एक चुंबकीय सुई (चुंबकीय द्विध्रुव) को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में क्षेत्र की दिशा के साथ $\theta$ कोण पर रखा गया है।
मान लीजिए $q_m$ सुई के प्रत्येक ध्रुव की ध्रुव प्रबलता है।
चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $m = q_m \times 2l$ द्वारा दिया जाता है।
उत्तरी ध्रुव $(N)$ पर कार्य करने वाला बल $\vec{F}_N = q_m \vec{B}$ है (क्षेत्र की दिशा में)।
दक्षिणी ध्रुव $(S)$ पर कार्य करने वाला बल $\vec{F}_S = -q_m \vec{B}$ है (क्षेत्र की विपरीत दिशा में)।
ये दो समान और विपरीत बल एक बल-युग्म (couple) बनाते हैं जो सुई पर एक टॉर्क $(\tau)$ लगाता है, जो इसे चुंबकीय क्षेत्र के साथ संरेखित करने के लिए घुमाने का प्रयास करता है।
टॉर्क $\tau = (\text{किसी एक बल का परिमाण}) \times (\text{दोनों बलों के बीच की लंबवत दूरी})$।
त्रिभुज $NDS$ की ज्यामिति से, लंबवत दूरी $ND = 2l \sin \theta$ है।
इसलिए, $\tau = (q_m B) \times (2l \sin \theta)$।
चूंकि $m = q_m(2l)$, इसलिए $\tau = m B \sin \theta$ प्राप्त होता है।
सदिश रूप में, इसे $\vec{\tau} = \vec{m} \times \vec{B}$ के रूप में व्यक्त किया जाता है।