(N/A) नाभिकीय संलयन अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के परमाणु नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं,जिसके साथ भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।
नाभिकीय संलयन अभिक्रिया के घटित होने के लिए आवश्यक शर्तें निम्नलिखित हैं:
$(i)$ संलयन करने वाले नाभिकों का तापमान अत्यंत उच्च,सामान्यतः $10^{7} \, K$ के आसपास होना चाहिए,ताकि धनावेशित नाभिकों के बीच के स्थिर वैद्युत प्रतिकर्षण बल को पार किया जा सके।
$(ii)$ नाभिकों को बहुत उच्च गति तक त्वरित किया जाना चाहिए,जिसे अक्सर कण त्वरक (particle accelerators) का उपयोग करके या उच्च दबाव वाले वातावरण बनाकर प्राप्त किया जाता है,ताकि वे पर्याप्त गतिज ऊर्जा के साथ टकराएं और संलयित हो सकें।