(N/A) $\Rightarrow$ केंचुए में प्रजनन के दौरान युग्मक विनिमय और प्रजनन की कार्यिकी को निम्नलिखित रूप में वर्णित किया जा सकता है:
$(i)$ केंचुए प्रोटोएंड्रस (protandrous) होते हैं,जिसका अर्थ है कि शुक्राणु कोशिकाएं अंडे के परिपक्व होने से पहले परिपक्व हो जाती हैं।
$(ii)$ मैथुन के दौरान दो केंचुओं के बीच शुक्राणुओं का आदान-प्रदान होता है,जिसके बाद बाह्य निषेचन होता है।
$(iii)$ मैथुन के दौरान,दो केंचुए विपरीत दिशाओं में एक-दूसरे के करीब आते हैं और अपनी अधर सतहों को एक-दूसरे के संपर्क में लाते हैं।
$(iv)$ वे शुक्राणु के पैकेटों का आदान-प्रदान करते हैं जिन्हें शुक्राणुधर (spermatophores) कहा जाता है।
$(v)$ इस प्रक्रिया के दौरान,नर जनन छिद्र के आसपास की त्वचा ऊपर उठकर अस्थायी पैपिला बनाती है,जो लिंग की तरह कार्य करके शुक्राणुधानी छिद्र में प्रवेश करती है और उसे खुला रखती है।
$(vi)$ एक बार जब एक शुक्राणुधानी भर जाती है,तो केंचुए अपनी स्थिति बदलते हैं ताकि नर जनन छिद्र दूसरी शुक्राणुधानी के साथ संरेखित हो सके। यह प्रक्रिया लगभग एक घंटे में पूरी होती है।
$(vii)$ शुक्राणु मुख्य रूप से शुक्राणुधानी के डायवर्टीकुला में संग्रहीत होते हैं,जबकि एम्पुला शुक्राणुओं के लिए पोषक तत्वों के स्राव से जुड़ा होता है।
$(viii)$ बाद में,शुक्राणु और अंडे दोनों को कोकून में जमा किया जाता है,जो क्लाइटेलम ग्रंथियों द्वारा स्रावित होता है।
$(ix)$ निषेचन और विकास कोकून के भीतर होता है,जो एक बाह्य प्रक्रिया है।