(N/A) $(i)$ डाईहाइड्रोजन क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन क्लोराइड $(HCl)$ बनाता है। अभिक्रिया: $H_2(g) + Cl_2(g) \rightarrow 2HCl(g)$। यहाँ,डाईहाइड्रोजन का $H^+$ में ऑक्सीकरण होता है और क्लोरीन का $Cl^-$ में अपचयन होता है,जिससे एक सहसंयोजक अणु बनता है।
$(ii)$ डाईहाइड्रोजन सोडियम के साथ अभिक्रिया करके सोडियम हाइड्राइड $(NaH)$ बनाता है। अभिक्रिया: $2Na(s) + H_2(g) \rightarrow 2NaH(s)$। यहाँ,$Na$ से $H$ में एक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित होता है,जिससे एक आयनिक यौगिक $Na^+H^-$ बनता है।
$(iii)$ डाईहाइड्रोजन कॉपर $(II)$ ऑक्साइड का कॉपर धातु में अपचयन करता है। अभिक्रिया: $CuO(s) + H_2(g) \rightarrow Cu(s) + H_2O(l)$। डाईहाइड्रोजन एक अपचायक के रूप में कार्य करता है और स्वयं जल $(H_2O)$ में ऑक्सीकृत हो जाता है।