(N/A) $CH_3CH=CHCH_3$ के $2$ ज्यामितीय समावयवी होते हैं:
$(i)$ $Cis$-but$-2$-ene
$(ii)$ $Trans$-but$-2$-ene
$Cis$-but$-2$-ene में,दो $CH_3$ समूह द्वि-आबंध के एक ही तरफ स्थित होते हैं। $C-CH_3$ आबंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते हैं,जिसके परिणामस्वरूप एक शुद्ध द्विध्रुव आघूर्ण $(\mu = 0.33 \ D)$ प्राप्त होता है,जो इसे ध्रुवीय बनाता है।
$Trans$-but$-2$-ene में,दो $CH_3$ समूह द्वि-आबंध के विपरीत दिशाओं में स्थित होते हैं। $C-CH_3$ आबंधों के द्विध्रुव आघूर्ण परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं,इसलिए वे एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं। इससे इसका शुद्ध द्विध्रुव आघूर्ण शून्य $(\mu = 0)$ हो जाता है,जो इसे अध्रुवीय बनाता है।