(N/A) $CaCO_3$ का मोलर द्रव्यमान $= 40 + 12 + 3 \times 16 = 100 \ g \ mol^{-1}$।
$1000 \ g$ में $CaCO_3$ के मोल:
$n_{CaCO_3} = \frac{1000 \ g}{100 \ g \ mol^{-1}} = 10 \ mol$।
$250 \ mL$ $0.76 \ M$ विलयन में $HCl$ के मोल:
$n_{HCl} = \text{मोलरता} \times \text{आयतन (L)} = 0.76 \ mol \ L^{-1} \times 0.250 \ L = 0.19 \ mol$।
अभिक्रिया $CaCO_{3(s)} + 2HCl_{(aq)} \to CaCl_{2(aq)} + CO_{2(g)} + H_2O_{(l)}$ की रससमीकरणमिति के अनुसार:
$1 \ mol$ $CaCO_3$ को $2 \ mol$ $HCl$ की आवश्यकता होती है।
चूंकि हमारे पास $10 \ mol$ $CaCO_3$ और केवल $0.19 \ mol$ $HCl$ है,इसलिए $HCl$ सीमांत अभिकर्मक है।
$2 \ mol$ $HCl$,$1 \ mol$ $CaCl_2$ बनाता है।
अतः,$0.19 \ mol$ $HCl$,$\frac{0.19}{2} = 0.095 \ mol$ $CaCl_2$ बनाएगा।
$CaCl_2$ का मोलर द्रव्यमान $= 40 + (2 \times 35.5) = 111 \ g \ mol^{-1}$।
$CaCl_2$ का द्रव्यमान $= 0.095 \ mol \times 111 \ g \ mol^{-1} = 10.545 \ g$।