(N/A) $BF_3$ में,फ्लोरीन परमाणु पर मौजूद इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म (lone pair) को $p\pi-p\pi$ बैक बॉन्डिंग के माध्यम से बोरोन परमाणु के रिक्त $p$-कक्षक में दान किया जाता है। इलेक्ट्रॉनों का यह विस्थानीकरण बोरोन परमाणु की इलेक्ट्रॉन न्यूनता को कम करता है,जिससे इसकी लुईस अम्लीय प्रकृति कम हो जाती है और $BF_3$ की स्थिरता बढ़ जाती है।
$BH_3$ में,बैक बॉन्डिंग में भाग लेने के लिए $H$ परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों का कोई एकाकी युग्म नहीं होता है। इसलिए,स्थिरता प्राप्त करने के लिए $BH_3$ द्विलकीकृत (dimerize) होकर $B_2H_6$ (डाइबोरेन) बनाता है।
$B_2H_6$ की संरचना: डाइबोरेन में,चार टर्मिनल $H$ परमाणु और दो $B$ परमाणु एक ही तल में स्थित होते हैं। दो ब्रिजिंग $H$ परमाणु इस तल के ऊपर और नीचे स्थित होते हैं। प्रत्येक बोरोन परमाणु $sp^3$ संकरित होता है। ब्रिजिंग $H$ परमाणु $3$-केंद्र-$2$-इलेक्ट्रॉन $(3c-2e)$ बंधों में शामिल होते हैं,जिन्हें बनाना बॉन्ड के रूप में भी जाना जाता है।