कथन $(A)$: $S.H.M$ में,गतिज और स्थितिज ऊर्जा तब समान हो जाती हैं जब दूरी इसके आयाम की $1/\sqrt{2}$ गुनी होती है। कारण $(R)$: $S.H.M$ करने वाले कण की स्थितिज ऊर्जा आवर्ती होती है और चरम विस्थापन पर अधिकतम होती है।

  • A
    $A$ और $R$ दोनों सही हैं। $R$,$A$ की सही व्याख्या है।
  • B
    $A$ और $R$ दोनों सही हैं। $R$,$A$ की सही व्याख्या नहीं है।
  • C
    $A$ सही है,लेकिन $R$ गलत है।
  • D
    $A$ गलत है,लेकिन $R$ सही है।

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एक सरल आवर्त दोलक का सामान्य विस्थापन $x = A \sin \omega t$ है। मान लीजिए $T$ इसका आवर्तकाल है। इसके स्थितिज ऊर्जा $(U)$ - समय $(t)$ वक्र की ढाल तब अधिकतम होगी जब $t = \frac{T}{\beta}$ हो। $\beta$ का मान $.........$ है।

$6 \text{ cm}$ आयाम वाली सरल आवर्त गति का विस्थापन क्या होगा जब उसकी गतिज ऊर्जा उसकी स्थितिज ऊर्जा के बराबर हो?

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