(A) $(i)$ $HCN$ के प्रति अभिक्रियाशीलता कार्बोनिल कार्बन की इलेक्ट्रोफिलिसिटी और त्रिविम बाधा (steric hindrance) पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे एल्काइल समूहों की संख्या बढ़ती है,त्रिविम बाधा और $+I$ प्रभाव दोनों बढ़ते हैं,जिससे अभिक्रियाशीलता कम हो जाती है। क्रम है: $\text{डाई-टर्ट-ब्यूटाइल कीटोन} < \text{मिथाइल टर्ट-ब्यूटाइल कीटोन} < \text{एसीटोन} < \text{एसीटैल्डिहाइड}$.
$(ii)$ अम्लीय सामर्थ्य इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूहों ($-I$ प्रभाव) के साथ बढ़ती है और इलेक्ट्रॉन-दाता समूहों ($+I$ प्रभाव) के साथ घटती है। $Br$ का $-I$ प्रभाव दूरी के साथ कम हो जाता है। क्रम है: $(CH_3)_2CHCOOH < CH_3CH_2CH_2COOH < CH_3CH(Br)CH_2COOH < CH_3CH_2CH(Br)COOH$.
$(iii)$ इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह $(-I, -M)$ अम्लीय सामर्थ्य को बढ़ाते हैं,जबकि इलेक्ट्रॉन-दाता समूह $(+M, +I)$ इसे घटाते हैं। क्रम है: $4\text{-मेथॉक्सीबेंजोइक अम्ल} < \text{बेंजोइक अम्ल} < 4\text{-नाइट्रोबेंजोइक अम्ल} < 3,4\text{-डाइनाइट्रोबेंजोइक अम्ल}$.