(N/A) $(i)$ $CH_3-CH=CH-CH_2-C\equiv CH$ में कार्बन का संकरण:
$CH_3$ $(sp^3)$,$-CH=$ $(sp^2)$,$=CH-$ $(sp^2)$,$-CH_2-$ $(sp^3)$,$-C\equiv$ $(sp)$,$\equiv CH$ $(sp)$.
$(ii)$ कुल $\sigma$ बंध = $13$,कुल $\pi$ बंध = $3$.
$(iii)$ $IUPAC$ नाम: $Hex-4-en-1-yne$.
$(iv)$ $C=C$ द्विबंध के कारण ज्यामितीय समावयवी संभव हैं:
$Cis$-समावयवी: $H_3C-C(H)=C(H)-CH_2-C\equiv CH$ ($CH_3$ और $CH_2-C\equiv CH$ एक ही तरफ)।
$Trans$-समावयवी: $H_3C-C(H)=C(H)-CH_2-C\equiv CH$ ($CH_3$ और $CH_2-C\equiv CH$ विपरीत तरफ)।
$(v)$ एल्काइन में $cis$ और $trans$ समावयवता संभव नहीं है क्योंकि त्रिबंध में शामिल कार्बन परमाणु $sp$ संकरित होते हैं और उनकी ज्यामिति रेखीय ($180^\circ$ बंध कोण) होती है,जो त्रिबंध के चारों ओर विभिन्न त्रिविम व्यवस्थाओं को रोकती है।
$(vi)$ $C=C$ की बंध लंबाई $(134 \ pm)$ $>$ $C\equiv C$ की बंध लंबाई $(120 \ pm)$.