(N/A) $\Rightarrow$ अर्धसूत्रीविभाजन-$II$ (Meiosis-$II$) समसूत्री विभाजन के समान एक समान विभाजन है,जिसमें गुणसूत्रों की संख्या इस चरण की जनक कोशिका के समान (अगुणित,$n=2$) रहती है।
$\Rightarrow$ पूर्वावस्था-$II$ (Prophase-$II$): केंद्रक झिल्ली गायब हो जाती है और गुणसूत्र संघनित हो जाते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र सेंट्रोमियर से जुड़ी दो सिस्टर क्रोमैटिड्स से बना होता है।
$\Rightarrow$ मध्यावस्था-$II$ (Metaphase-$II$): गुणसूत्र विषुवतीय पट्टिका पर संरेखित होते हैं। विपरीत ध्रुवों से तर्कु तंतु (spindle fibers) सिस्टर क्रोमैटिड्स के काइनेटोकोर से जुड़ जाते हैं।
$\Rightarrow$ पश्चावस्था-$II$ (Anaphase-$II$): प्रत्येक गुणसूत्र का सेंट्रोमियर विभाजित हो जाता है,जिससे सिस्टर क्रोमैटिड्स विपरीत ध्रुवों की ओर जाने लगती हैं। अब इन्हें स्वतंत्र गुणसूत्र कहा जाता है।
$\Rightarrow$ अंत्यावस्था-$II$ (Telophase-$II$): गुणसूत्र ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं और केंद्रक आवरण फिर से बन जाता है,जिसके परिणामस्वरूप चार अगुणित संतति कोशिकाएं उत्पन्न होती हैं।