एक प्रेरक कुंडली (inductive coil) का प्रतिरोध $100 \ \Omega$ है। जब $1000 \ Hz$ आवृत्ति का a.c. सिग्नल कुंडली पर लगाया जाता है,तो वोल्टेज धारा से $45^{\circ}$ आगे रहता है। कुंडली का प्रेरकत्व (inductance) है

  • A
    $\frac{0.25}{2 \pi} \ H$
  • B
    $\frac{0.05}{\pi} \ H$
  • C
    $\frac{0.25}{\pi} \ H$
  • D
    $\frac{0.5}{\pi} \ H$

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परिवर्ती कोणीय आवृत्ति $\omega$ और निश्चित आयाम $V_0$ वाला एक $AC$ वोल्टेज स्रोत,एक संधारित्र $C$ और $R$ प्रतिरोध वाले एक इलेक्ट्रिक बल्ब (प्रेरकत्व शून्य) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है। जब $\omega$ को बढ़ाया जाता है,

एक आवेशित संधारित्र समय नियतांक $\tau$ के साथ प्रतिरोध $R$ के माध्यम से डिस्चार्ज होता है। अब इन दोनों को $\omega = \frac{1}{\tau}$ कोणीय आवृत्ति वाले $AC$ स्रोत के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। परिपथ की प्रतिबाधा (impedance) क्या होगी?

दिखाए गए परिपथ में वोल्टमीटर और एमीटर का पाठ्यांक (reading) क्या होगा?

एक $L-R$ परिपथ में,प्रेरणिक प्रतिघात (inductive reactance) परिपथ के प्रतिरोध $R$ के बराबर है। परिपथ में $E = E_0 \cos \omega t$ का emf लगाया जाता है। परिपथ में व्ययित शक्ति (power consumed) है

जब $100\, V$ $DC$ को एक सोलेनोइड पर लगाया जाता है,तो इसमें $1\, A$ की धारा बहती है। जब उसी कुंडली पर $100\, V$ $AC$ लगाया जाता है,तो धारा घटकर $0.5\, A$ हो जाती है। यदि $AC$ स्रोत की आवृत्ति $50\, Hz$ है,तो सोलेनोइड का प्रतिबाधा (impedance) और प्रेरकत्व (inductance) क्या हैं?

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