(N/A) एल्कीन में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल का योग इलेक्ट्रॉनस्नेही योगज अभिक्रिया द्वारा होता है।
$(i)$ एथीन के लिए:
$CH_2=CH_2 + H-OSO_3H \xrightarrow{298 \ K} CH_3-CH_2-OSO_3H$ (एथिल हाइड्रोजन सल्फेट)
$(ii)$ प्रोपीन के लिए:
$CH_3-CH=CH_2 + H-OSO_3H \xrightarrow{298 \ K} CH_3-CH(OSO_3H)-CH_3$ (आइसोप्रोपिल हाइड्रोजन सल्फेट)
क्रियाविधि:
$1$. सल्फ्यूरिक अम्ल वियोजित होकर एक इलेक्ट्रॉनस्नेही $H^{\delta+}$ और एक नाभिकस्नेही $^{-}OSO_3H$ प्रदान करता है।
$2$. इलेक्ट्रॉनस्नेही $H^{\delta+}$ $\pi$-बंध पर आक्रमण करके कार्बधनायन बनाता है।
$3$. प्रोपीन जैसे असममित एल्कीन में,अभिक्रिया मार्कोवनिकोव नियम का पालन करती है,जिससे अधिक स्थायी कार्बधनायन $(CH_3-CH^+-CH_3)$ बनता है।
$4$. इसके बाद नाभिकस्नेही $^{-}OSO_3H$ कार्बधनायन पर आक्रमण करके अंतिम एल्किल हाइड्रोजन सल्फेट उत्पाद बनाता है।