(N/A) अनंत लंबे तार से $r$ दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r}$ होता है।
तार से $r$ दूरी पर $dr$ मोटाई और $L_1$ लंबाई की एक पट्टी पर विचार करें।
इस पट्टी से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स $d\phi = B \cdot dA = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} (L_1 dr)$ है।
आयताकार लूप $ABCD$ से जुड़ा कुल चुंबकीय फ्लक्स $\phi$,$r = x$ से $r = x + L_2$ तक $d\phi$ का समाकलन है:
$\phi = \int_{x}^{x+L_2} \frac{\mu_0 I L_1}{2 \pi r} dr = \frac{\mu_0 I L_1}{2 \pi} [\ln r]_{x}^{x+L_2} = \frac{\mu_0 I L_1}{2 \pi} \ln \left( \frac{x + L_2}{x} \right)$.
प्रेरित धारा $i = \frac{|d\phi/dt|}{R}$ है। समय $T$ में गुजरने वाला कुल आवेश $Q = \int i dt = \frac{1}{R} \int |d\phi| = \frac{|\Delta \phi|}{R}$ है।
$t = 0$ पर,$I(0) = I_0$,इसलिए $\phi_i = \frac{\mu_0 I_0 L_1}{2 \pi} \ln \left( \frac{x + L_2}{x} \right)$.
$t = T$ पर,$I(T) = 0$,इसलिए $\phi_f = 0$.
फ्लक्स में परिवर्तन का परिमाण $|\Delta \phi| = |\phi_f - \phi_i| = \frac{\mu_0 I_0 L_1}{2 \pi} \ln \left( \frac{x + L_2}{x} \right)$ है।
अतः,कुल आवेश $Q = \frac{\mu_0 I_0 L_1}{2 \pi R} \ln \left( 1 + \frac{L_2}{x} \right)$ प्राप्त होता है।