(N/A) इस दोष को हाइपरमेट्रोपिया (Hypermetropia) या दूरदृष्टि दोष कहा जाता है। इस स्थिति में,आँख का निकट बिंदु सामान्य $25 \,cm$ से दूर हट जाता है।
इसे उपयुक्त फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस का उपयोग करके सुधारा जा सकता है,जो $25 \,cm$ पर रखी वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणों को आँख के वास्तविक निकट बिंदु $(N')$ पर अभिसरित (converge) करता है,जिससे आँख रेटिना पर प्रतिबिंब बना पाती है।
$(i)$ दोषपूर्ण आँख: सामान्य निकट बिंदु $(N = 25 \,cm)$ पर रखी वस्तु से आने वाली किरणें रेटिना के पीछे केंद्रित होती हैं क्योंकि आँख का निकट बिंदु $N'$ पर स्थानांतरित हो गया है।
$(ii)$ संशोधित आँख: आँख के सामने एक उत्तल लेंस रखा जाता है। यह ($N$ पर रखी) वस्तु का आभासी प्रतिबिंब आँख के वास्तविक निकट बिंदु $(N')$ पर बनाता है। इसके बाद आँख इस प्रतिबिंब को रेटिना पर केंद्रित कर लेती है।