(N/A) चालक को कागज के तल में ही रखा जाना चाहिए। चूंकि दिक्सूचक की सुई की धुरी ऊर्ध्वाधर (vertical) होती है,इसलिए दिक्सूचक के तल में स्थित धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र भी सुई की स्थिति पर ऊर्ध्वाधर होगा। एक ऊर्ध्वाधर चुंबकीय क्षेत्र दिक्सूचक की सुई पर कोई बल आघूर्ण (torque) नहीं लगा सकता जो केवल क्षैतिज तल में घूमने के लिए धुरी पर टिकी है,इसलिए विक्षेप में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
विक्षेप तब अधिकतम होता है जब $A$ से गुजरने वाले चालक को कागज के तल के लंबवत रखा जाता है। इस स्थिति में,विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कागज के तल में संकेंद्रित वृत्त बनाती हैं,जो दिक्सूचक की सुई पर अधिकतम क्षैतिज बल आघूर्ण लगाती हैं।