(A) दिया गया है: प्रेरकत्व $L = 0.50 \; H$,प्रतिरोध $R = 100 \; \Omega$,$RMS$ वोल्टेज $V_{rms} = 240 \; V$,आवृत्ति $\nu = 10 \; kHz = 10^4 \; Hz$.
$(a)$ पीक वोल्टेज $V_0 = V_{rms} \sqrt{2} = 240 \sqrt{2} \approx 339.4 \; V$.
कोणीय आवृत्ति $\omega = 2 \pi \nu = 2 \pi \times 10^4 \; rad/s$.
प्रेरक प्रतिघात $X_L = \omega L = 2 \pi \times 10^4 \times 0.5 = \pi \times 10^4 \approx 31416 \; \Omega$.
प्रतिबाधा $Z = \sqrt{R^2 + X_L^2} = \sqrt{100^2 + (31416)^2} \approx 31416 \; \Omega$.
अधिकतम धारा $I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{339.4}{31416} \approx 1.08 \times 10^{-2} \; A$.
$(b)$ कला कोण $\phi = \tan^{-1}(\frac{\omega L}{R}) = \tan^{-1}(\frac{31416}{100}) \approx \tan^{-1}(314.16) \approx 89.82^{\circ}$.
समय अंतराल $\Delta t = \frac{\phi}{\omega} = \frac{89.82 \times \pi / 180}{2 \pi \times 10^4} \approx 2.5 \times 10^{-5} \; s = 25 \; \mu s$.
बहुत उच्च आवृत्तियों पर,$X_L = \omega L$ बहुत बड़ा हो जाता है,जिससे $Z$ बहुत बड़ा हो जाता है,इसलिए $I_0 \to 0$,जो एक ओपन सर्किट की तरह कार्य करता है। स्थिर अवस्था में $DC$ परिपथ में,$\omega = 0$,इसलिए $X_L = 0$,और प्रेरक एक शुद्ध चालक (शॉर्ट सर्किट) के रूप में कार्य करता है।