एक फोटोसेल के कैथोड के पदार्थ को इस प्रकार बदला जाता है कि सतह का कार्यफलन (work function) $W_1$ से बदलकर $W_2$ हो जाता है $(W_2 > W_1)$। यदि कैथोड की सतह बदलने से पहले और बाद में उत्पन्न फोटोइलेक्ट्रिक धारा क्रमशः $I_1$ और $I_2$ है तथा $hf > W_2$ है,तो:

  • A
    $I_1 = I_2$
  • B
    $I_1 < I_2$
  • C
    $I_1 > I_2$
  • D
    $I_1 < I_2 < 2I_1$

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$10^{-5} \; W m^{-2}$ तीव्रता का प्रकाश $2 \; cm^2$ सतह क्षेत्र वाले सोडियम फोटो-सेल पर गिरता है। यह मानते हुए कि सोडियम की ऊपरी $5$ परतें आपतित ऊर्जा को अवशोषित करती हैं,विकिरण के तरंग-चित्र (wave-picture) में फोटोइलेक्ट्रिक उत्सर्जन के लिए आवश्यक समय का अनुमान लगाइए। धातु का कार्य फलन (work function) $2 \; eV$ दिया गया है। आपके उत्तर का क्या निहितार्थ है?

एक फोटोइलेक्ट्रिक सेल में ऊर्जा का रूपांतरण किसमें होता है?

निम्नलिखित दो कथनों $A$ और $B$ पर विचार करें और उत्तरों में दिए गए सही विकल्प की पहचान करें:
$(A)$ फोटोवोल्टिक सेल में उत्पन्न फोटोइलेक्ट्रिक धारा आपतित प्रकाश की तीव्रता के समानुपाती नहीं होती है।
$(B)$ गैस से भरे फोटोएमिसिव सेल में, फोटोइलेक्ट्रॉनों का वेग आपतित विकिरण की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है।

एक धातु के लिए देहली आवृत्ति (threshold frequency) $15 \times 10^{14} \, Hz$ है। यदि $6000 \, \text{Å}$ तरंगदैर्ध्य का प्रकाश धातु की सतह पर आपतित होता है, तो फोटोइलेक्ट्रॉन [हवा में प्रकाश का वेग, $c = 3 \times 10^8 \, m/s$]:

धातु से उत्सर्जित होने वाले फोटोइलेक्ट्रॉन समान ऊर्जा के साथ बाहर नहीं आते हैं। इसका सबसे उपयुक्त स्पष्टीकरण क्या है?

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