एक निश्चित तापमान पर शुद्ध बेंजीन का वाष्प दाब $640 \ mm \ Hg$ है। $2.175 \ g$ अवाष्पशील विद्युत-अनपघट्य ठोस को $39.0 \ g$ बेंजीन में मिलाया जाता है। विलयन का वाष्प दाब $600 \ mm \ Hg$ हो जाता है। ठोस पदार्थ का मोलर द्रव्यमान क्या है?

  • A
    $6.96$
  • B
    $65.25$
  • C
    $63.8$
  • D
    इनमें से कोई नहीं

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कथन : यदि विलायक से अधिक वाष्पशील द्रव विलेय को विलायक में मिलाया जाता है,तो विलयन का वाष्प दाब बढ़ सकता है अर्थात $p_s > p^o$।
कारण : अधिक वाष्पशील द्रव विलेय की उपस्थिति में,केवल विलेय ही वाष्प बनाएगा और विलायक नहीं।

दो द्रव $A$ और $B$ $306 \ K$ पर एक विलयन बनाते हैं जो समीकरण $P \ (\text{in } atm) = 0.172X_A + 0.215$ का पालन करता है,जहाँ $P$ विलयन का कुल वाष्प दाब है और $X_A$ $A$ का मोल अंश है। शुद्ध $B$ का वाष्प दाब ............ होगा। ($atm$ में)

Difficult
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एक निश्चित तापमान पर शुद्ध बेंजीन का वाष्प दाब $0.850 \ bar$ है। $0.5 \ g$ वजन वाले एक अवाष्पशील,गैर-इलेक्ट्रोलाइट ठोस को $39.0 \ g$ बेंजीन (मोलर द्रव्यमान $78 \ g/mol$) में मिलाया जाता है। तब विलयन का वाष्प दाब $0.845 \ bar$ हो जाता है। ठोस पदार्थ का आणविक द्रव्यमान क्या है?

$373 \ K$ पर ग्लूकोज के एक तनु जलीय विलयन का वाष्प दाब $750 \ mm$ मरकरी है। विलायक का मोल अंश है

बंद पात्र में रखे पानी के वाष्प दाब में निम्नलिखित में से कौन सा परिवर्तन कमी लाता है?

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