(N/A) ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार,ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है,इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
$(b)$ दिया गया है: द्रव्यमान $m = 1500 \, kg$,प्रारंभिक वेग $u = 36 \, km/h = 10 \, m/s$,अंतिम वेग $v = 72 \, km/h = 20 \, m/s$.
किया गया कार्य $(W)$ = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन = $\frac{1}{2} m (v^2 - u^2)$.
$W = \frac{1}{2} \times 1500 \times (20^2 - 10^2) = 750 \times (400 - 100) = 750 \times 300 = 225,000 \, J$ या $2.25 \times 10^5 \, J$.
चूंकि वेग में वृद्धि हो रही है,इसलिए किया गया कार्य धनात्मक है।
$(c)$ दोलन करते हुए लोलक की अधिकतम स्थितिज ऊर्जा $(PE)$ उसके चरम स्थितियों (extreme positions) पर होती है और अधिकतम गतिज ऊर्जा $(KE)$ उसके माध्य स्थिति (mean position) पर होती है।