(D) $(i)$ जब किसी वस्तु को एक निश्चित कोण पर फेंका जाता है, तो वह अधिकतम ऊँचाई $h$ तक ऊपर जाती है और फिर परवलयाकार पथ का अनुसरण करते हुए वापस जमीन पर आ जाती है। ऊपर जाते समय गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य $W_{against} = mgh$ है। नीचे गिरते समय गुरुत्वाकर्षण द्वारा किया गया कार्य $W_{by} = mgh$ है। चूँकि प्रारंभिक और अंतिम बिंदु एक ही क्षैतिज रेखा पर हैं, इसलिए ऊर्ध्वाधर दिशा में कुल विस्थापन $0$ है। अतः, गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कुल कार्य $W_{net} = W_{against} + W_{by} = -mgh + mgh = 0 \, J$ है।
$(ii)$ दिया गया है: द्रव्यमान $m = 20 \, kg$, प्रारंभिक वेग $u = 5 \, m s^{-1}$, अंतिम वेग $v = 2 \, m s^{-1}$।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, बल द्वारा किया गया कार्य गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है:
$W = \Delta KE = \frac{1}{2} m v^2 - \frac{1}{2} m u^2$
$W = \frac{1}{2} \times 20 \times (2)^2 - \frac{1}{2} \times 20 \times (5)^2$
$W = 10 \times 4 - 10 \times 25$
$W = 40 - 250 = -210 \, J$।