(N/A) पृथ्वी के वायुमंडल में वायु के अणु और अन्य सूक्ष्म कण होते हैं। इन कणों का आकार दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य से छोटा होता है। रेले प्रकीर्णन के नियम के अनुसार, प्रकीर्णन की मात्रा तरंगदैर्घ्य की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है $(I \propto 1/\lambda^4)$। चूंकि नीले प्रकाश की तरंगदैर्घ्य लाल प्रकाश की तुलना में कम होती है, इसलिए वायुमंडलीय कणों द्वारा इसका प्रकीर्णन सभी दिशाओं में बहुत अधिक होता है। जब यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश हमारी आँखों में प्रवेश करता है, तो आकाश नीला दिखाई देता है।
$(b)$ सूर्योदय या सूर्यास्त के समय, सूर्य क्षितिज के पास होता है। सूर्य के प्रकाश को प्रेक्षक तक पहुँचने के लिए पृथ्वी के वायुमंडल की एक बहुत मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है। इस लंबी यात्रा के दौरान, नीले और कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का अधिकांश भाग वायुमंडलीय कणों द्वारा प्रकीर्णित होकर बिखर जाता है। केवल सबसे लंबी तरंगदैर्घ्य वाला प्रकाश, जो कि लाल प्रकाश है, बिना अधिक प्रकीर्णित हुए प्रेक्षक की आँखों तक पहुँच पाता है। इसलिए, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है।