(N/A) बोहर के परमाणु मॉडल की विशेषताएँ:
$(i)$ इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं,जो एक निश्चित ऊर्जा से जुड़ी होती हैं। इन्हें ऊर्जा स्तर या कोश (shells) कहा जाता है,जिन्हें $K, L, M, N, ...$ के रूप में दर्शाया जाता है।
$(ii)$ जब तक इलेक्ट्रॉन इन निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं,वे ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं।
$(iii)$ नाभिक से दूरी बढ़ने के साथ कक्षा की ऊर्जा बढ़ती है। नाभिक के सबसे निकट वाली कक्षा की ऊर्जा सबसे कम होती है।
$(iv)$ जब इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा दी जाती है,तो वह उच्च ऊर्जा स्तर में चला जाता है। जब वह निचले ऊर्जा स्तर में वापस आता है,तो वह विकिरण के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करता है।
$(b)$ $(i)$ $_{26}^{58} A$ और $_{28}^{58} B$ समभारिक हैं क्योंकि उनकी द्रव्यमान संख्या समान $(58)$ है लेकिन परमाणु संख्या अलग ($26$ और $28$) है।
$(ii)$ $_{35}^{79} X$ और $_{35}^{80} Y$ समस्थानिक हैं क्योंकि उनकी परमाणु संख्या समान $(35)$ है लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग ($79$ और $80$) है।
$(c)$ तत्व $B$ (परमाणु संख्या $16$) तत्व $A$ (परमाणु संख्या $18$) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है। $A$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2, 8, 8$ है,जो एक स्थिर अष्टक (अक्रिय गैस विन्यास) है। $B$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2, 8, 6$ है,जिसे अपना अष्टक पूरा करने के लिए दो और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है,जो इसे रासायनिक रूप से अभिक्रियाशील बनाता है।