$(A-D)$ $(i)$ कठोरता: $\text{गैस } < \text{द्रव } < \text{ठोस}$
$(ii)$ विसरण: $\text{ठोस } < \text{द्रव } < \text{गैस}$
$(iii)$ संपीड्यता: $\text{ठोस } < \text{द्रव } < \text{गैस}$
$(b)$ $(i)$ गैस का प्रसार: गर्म करने पर गैसों का प्रसार होता है क्योंकि कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जो उनके बीच के आकर्षण बलों को तोड़ देती है। इससे गैस के अणु हर संभव दिशा में यादृच्छिक रूप से गति कर सकते हैं और पात्र की दीवारों पर दबाव डालते हैं।
$(ii)$ गैस की संपीड्यता: गैसों में अंतःकण आकर्षण बल बहुत कमजोर होते हैं और उनके बीच काफी रिक्त स्थान होता है। इसलिए, जब बाहरी दबाव डाला जाता है, तो गैस के कण एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं, जिससे उनका आयतन कम हो जाता है और वे द्रवीभूत हो सकते हैं।