(N/A) नामांकन इस प्रकार है:
$A -$ परागकण
$B -$ पराग नलिका
$C -$ अंडाशय
$D -$ मादा जनन कोशिका (अंड कोशिका)
$(b)$ परागण: परागकणों का परागकोश से फूल के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण होने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं।
महत्व: यह निषेचन के लिए आवश्यक है,क्योंकि यह नर युग्मकों को मादा प्रजनन अंग तक पहुँचाता है।
$(c)$ फूलों में निषेचन तब होता है जब एक परागकण उपयुक्त वर्तिकाग्र पर गिरता है और अंकुरित होकर एक पराग नलिका बनाता है। यह नलिका वर्तिका से होकर नर जनन कोशिका को ले जाती है और अंडाशय तक पहुँचती है। इसके बाद नर जनन कोशिका बीजांड में मौजूद मादा जनन कोशिका के साथ संलयित होकर युग्मनज बनाती है।
$(i)$ बीज बीजांड से विकसित होता है।
$(ii)$ फल अंडाशय से विकसित होता है।