(N/A) ग्रीनहाउस गैसें: ग्रीनहाउस गैसें ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार होती हैं। वे पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरणों (infrared radiation) को अवशोषित करती हैं और उन्हें वापस पृथ्वी की ओर उत्सर्जित करती हैं,जिससे पृथ्वी का तापमान बना रहता है। उदाहरणों में $CO_2$,मीथेन और $CFCs$ शामिल हैं। इन गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन होता है।
$(b)$ उत्प्रेरक परिवर्तक: जहरीली गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तक लगाए जाते हैं। इनमें उत्प्रेरक के रूप में प्लैटिनम-पैलेडियम और रोडियम जैसी महंगी धातुओं का उपयोग किया जाता है। जब निकास गैसें इनसे गुजरती हैं,तो बिना जले हाइड्रोकार्बन $CO_2$ और पानी में परिवर्तित हो जाते हैं,और कार्बन मोनोऑक्साइड तथा नाइट्रिक ऑक्साइड क्रमशः $CO_2$ और नाइट्रोजन गैस में बदल जाते हैं।
$(c)$ पराबैंगनी-$B$ $(UV-B)$: $UV-B$ विकिरण $DNA$ को नुकसान पहुंचाते हैं और उत्परिवर्तन (mutations) का कारण बनते हैं। यह त्वचा की उम्र बढ़ने,त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान और विभिन्न प्रकार के त्वचा कैंसर का कारण बनता है। मानव आंखों में,कॉर्निया $UV-B$ विकिरण को अवशोषित करता है,और $UV-B$ की उच्च खुराक कॉर्निया में सूजन पैदा करती है,जिसे स्नो-ब्लाइंडनेस,मोतियाबिंद आदि कहा जाता है। इस तरह के संपर्क से कॉर्निया को स्थायी नुकसान हो सकता है।