(N/A) $S_N2$ अभिक्रिया की क्रियाविधि $1937$ में एडवर्ड डी. ह्यूजेस और सर क्रिस्टोफर इनगोल्ड द्वारा प्रस्तावित की गई थी।
$S_N2$ अभिक्रिया की मुख्य विशेषताएं:
$(a)$ यह अभिक्रिया द्वि-आण्विक है,जिसका अर्थ है कि अभिक्रिया की दर अभिकारक $(CH_3Cl)$ और नाभिकरागी $(OH^-)$ दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है।
$(b)$ यह एक नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जिसमें लीविंग ग्रुप $(-Cl)$ को नाभिकरागी $(-OH)$ द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है और उत्पाद $CH_3OH$ बनता है।
$(c)$ यह अभिक्रिया एक ही चरण में होती है। जैसे ही नाभिकरागी $(OH^-)$ कार्बन परमाणु पर लीविंग ग्रुप की विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,$C-Cl$ बंध टूटने लगता है और साथ ही $C-OH$ बंध बनने लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान कोई मध्यवर्ती नहीं बनता है।