(N/A) नाभिकरागी: वे प्रजातियां जो इलेक्ट्रॉन-समृद्ध होती हैं और इलेक्ट्रॉन-न्यून केंद्र को इलेक्ट्रॉन युग्म दान करती हैं,उन्हें नाभिकरागी कहा जाता है। उदाहरण: $:CN^-$,$OH^-$,$OR^-$,$NH_3$,$RCOO^-$,$H^-$,आदि।
$(b)$ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया:
$(i)$ वह अभिक्रिया जिसमें एक नाभिकरागी,क्रियाकारक अणु में पहले से मौजूद नाभिकरागी (अवशिष्ट समूह) को प्रतिस्थापित करता है,उसे नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
$(ii)$ हैलोऐल्केन में,हैलोजन से जुड़ा कार्बन परमाणु विद्युतऋणात्मकता के अंतर के कारण आंशिक रूप से धनावेशित होता है,जो इसे नाभिकरागी आक्रमण के लिए संवेदनशील बनाता है।
$(iii)$ अभिक्रिया के दौरान,हैलोजन परमाणु हैलाइड आयन के रूप में बाहर निकलता है,जिसे 'अवशिष्ट समूह' (leaving group) कहा जाता है।
$(iv)$ सामान्य अभिक्रिया: $R-X + Nu^- \rightarrow R-Nu + X^-$,जहाँ $R-X$ हैलोऐल्केन है,$Nu^-$ नाभिकरागी है और $X^-$ बाहर निकलने वाला हैलाइड आयन है।