(N/A) एराइल हैलाइड को एल्काइल हैलाइड की विधि से नहीं बनाया जा सकता क्योंकि फिनोल का $C-OH$ बंध अल्कोहल के $C-OH$ बंध की तुलना में अधिक मजबूत होता है।
$(a)$ एरीन से इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन द्वारा एराइल हैलाइड का विरचन:
विधि: एरीन यौगिकों की आयरन या आयरन $(III)$ क्लोराइड जैसे लुईस अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में क्लोरीन $(Cl_2)$ और ब्रोमीन $(Br_2)$ के साथ अभिक्रिया कराने पर क्रमशः एराइल क्लोराइड और एराइल ब्रोमाइड बनते हैं।
क्रियाविधि: यह अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन द्वारा होती है। उत्प्रेरक लुईस अम्ल इलेक्ट्रॉनरागी ($Cl^+$ या $Br^+$) उत्पन्न करता है।
अभिक्रिया: $C_6H_6 + X_2 \xrightarrow{Fe/FeX_3, \Delta} C_6H_5X + HX$ (जहाँ $X = Cl, Br$)।
ऑर्थो और पैरा समावयवियों को उनके गलनांक में बड़े अंतर के कारण आसानी से अलग किया जा सकता है।
आयोडिनेशन: इस अभिक्रिया में उत्पन्न $HI$ के ऑक्सीकरण के लिए $HNO_3$ या $HIO_4$ जैसे ऑक्सीकारक की आवश्यकता होती है।
फ्लोरीनेशन: फ्लोरीन की अत्यधिक उच्च अभिक्रियाशीलता के कारण इस विधि से फ्लोरो यौगिक नहीं बनाए जा सकते।
$(b)$ एमाइन से सैंडमेयर अभिक्रिया द्वारा एराइल हैलाइड का विरचन:
$(i)$ डायज़ोटाइजेशन: प्राथमिक एरोमैटिक एमाइन को ठंडे जलीय खनिज अम्ल में घोलकर सोडियम नाइट्राइट $(NaNO_2)$ के साथ अभिक्रिया कराने पर डायज़ोनियम लवण $(ArN_2^+ X^-)$ बनता है।
अभिक्रिया: $C_6H_5NH_2 + NaNO_2 + 2HX \xrightarrow{273-278 K} C_6H_5N_2^+ X^- + 2H_2O + NaX$।
$(ii)$ सैंडमेयर अभिक्रिया: ताजे बने डायज़ोनियम लवण के विलयन को क्यूप्रस क्लोराइड $(Cu_2Cl_2)$ या क्यूप्रस ब्रोमाइड $(Cu_2Br_2)$ के साथ उपचारित करने पर डायज़ोनियम समूह $(N_2^+ X^-)$ का $-Cl$ या $-Br$ द्वारा प्रतिस्थापन हो जाता है।
अभिक्रिया: $C_6H_5N_2^+ X^- \xrightarrow{Cu_2X_2} C_6H_5X + N_2$।