(N/A) एल्केन का मुक्त मूलक हैलोजनीकरण: $Cl_2$ और $h\nu$ या ऊष्मा की उपस्थिति में एल्केन का मुक्त मूलक क्लोरीनीकरण और $Br_2$ तथा $h\nu$ या ऊष्मा की उपस्थिति में ब्रोमीनीकरण करने से मोनो और पॉली-हैलोजन यौगिकों का मिश्रण प्राप्त होता है। इन घटकों को शुद्ध रूप में अलग करना कठिन है। इसलिए,यह विधि किसी एक एल्काइल हैलाइड को तैयार करने के लिए उपयुक्त नहीं है।
$(b)$ एल्कीन से एल्काइल हैलाइड:
$(i)$ एल्कीन का हाइड्रोहैलोजनीकरण: एल्कीन में हाइड्रोजन हैलाइड ($HCl$,$HBr$,या $HI$) जोड़ने से इलेक्ट्रोफिलिक योगात्मक अभिक्रिया के माध्यम से एल्काइल हैलाइड बनते हैं। यदि दो योगात्मक उत्पाद संभव हों,तो मार्कोवनिकोव के नियम के अनुसार मुख्य उत्पाद बनता है। उदाहरण के लिए:
$CH_3CH=CH_2 + HI \rightarrow CH_3CHICH_3 \text{ (मुख्य)} + CH_3CH_2CH_2I \text{ (गौण)}$
$(ii)$ एल्कीन में हैलोजन $(X_2)$ का योग: $CCl_4$ में घुले हुए ब्रोमीन $(Br_2)$ को एल्कीन में मिलाने से विसिनल डाइब्रोमाइड का निर्माण होता है। $CCl_4$ में $Br_2$ का लाल-भूरा रंग गायब हो जाता है क्योंकि रंगहीन डाइब्रोमाइड बनता है,जो असंतृप्ति (द्वि-आबंध) के लिए एक प्रयोगशाला परीक्षण है।