(N/A) प्रकाशिक समावयवी (optical isomers) ऐसे दर्पण प्रतिबिंब होते हैं जिन्हें एक-दूसरे पर अध्यारोपित (superimpose) नहीं किया जा सकता है। इन्हें प्रतिबिंब रूप (enantiomers) कहा जाता है।
अणु या आयन जिन्हें अध्यारोपित नहीं किया जा सकता,उन्हें कायरल (chiral) कहा जाता है।
ध्रुवणमापी (polarimeter) में समतल ध्रुवित प्रकाश को किस दिशा में घुमाते हैं,इसके आधार पर दो रूपों को दक्षिण-ध्रुवण घूर्णक $(d)$ (दाहिनी ओर) और वाम-ध्रुवण घूर्णक $(l)$ (बाईं ओर) कहा जाता है।
प्रकाशिक समावयवता द्विदंतुक लिगेंड वाले अष्टफलकीय संकुलों में सामान्य है। $[PtCl_{2}(en)_{2}]^{2+}$ प्रकार के संकुल में,केवल सिस-समावयवी ही प्रकाशिक सक्रियता प्रदर्शित करता है।