(N/A) $1$. परिभाषा: परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ लैंथेनॉइड्स की परमाणु और आयनिक त्रिज्याओं में होने वाली क्रमिक कमी को लैंथेनॉइड संकुचन कहा जाता है।
$2$. कारण: यह एक ही उपकोश में एक $4f$ इलेक्ट्रॉन द्वारा दूसरे $4f$ इलेक्ट्रॉन के अपूर्ण परिरक्षण (shielding) के कारण होता है। जैसे-जैसे प्रत्येक चरण में परमाणु क्रमांक $1$ इकाई बढ़ता है,$4f$ इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉनों को बढ़ते हुए नाभिकीय आकर्षण से प्रभावी ढंग से परिरक्षित करने में विफल रहते हैं,जिससे आकार में संकुचन होता है।
$3$. परिणाम:
$(a)$ गुणों में समानता: लैंथेनॉइड संकुचन के कारण दूसरी और तीसरी संक्रमण श्रेणियों के तत्वों (जैसे $Zr$ और $Hf$) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान होती हैं।
$(b)$ पृथक्करण में कठिनाई: आयनिक त्रिज्याओं और रासायनिक गुणों में समानता के कारण,लैंथेनॉइड्स को उनके मिश्रण से अलग करना बहुत कठिन होता है।
$(c)$ क्षारीय सामर्थ्य: लैंथेनॉइड हाइड्रॉक्साइड्स की क्षारीय सामर्थ्य $La(OH)_3$ से $Lu(OH)_3$ तक घटती है क्योंकि आकार घटता है और सहसंयोजक गुण बढ़ता है।