(N/A) हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण एक दो-चरणीय अभिक्रिया है जिसका उपयोग एल्कीन को अल्कोहल में बदलने के लिए किया जाता है।
चरण $1$ (हाइड्रोबोरेशन): एल्कीन डाइबोरेन $(BH_3)_2$ के साथ अभिक्रिया करके ट्राईअल्काइलबोरेन बनाती है।
चरण $2$ (ऑक्सीकरण): ट्राईअल्काइलबोरेन का जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(NaOH)$ की उपस्थिति में हाइड्रोजन पेरोक्साइड $(H_2O_2)$ द्वारा ऑक्सीकरण किया जाता है,जिससे अल्कोहल प्राप्त होता है।
उदाहरण: प्रोपीन की डाइबोरेन के साथ अभिक्रिया और उसके बाद ऑक्सीकरण करने पर प्रोपेन$-1-$ऑल प्राप्त होता है।
$3CH_3-CH=CH_2 + \frac{1}{2}(BH_3)_2 \rightarrow (CH_3-CH_2-CH_2)_3B$
$(CH_3-CH_2-CH_2)_3B + 3H_2O_2/OH^- \rightarrow 3CH_3-CH_2-CH_2-OH + B(OH)_3$
इस अभिक्रिया में,एल्कीन में $H_2O$ का योग एंटी-मार्कोवनिकोव नियम के अनुसार होता है,जिसमें हाइड्रॉक्सिल समूह कम प्रतिस्थापित कार्बन परमाणु से जुड़ता है।