(N/A) $PCR$ - पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (in vitro विधि) एक आणविक जैविक तकनीक है,जिसका उपयोग $DNA$ के एक छोटे खंड या उसकी कुछ प्रतियों को कम समय (लगभग $2$ घंटे) में लाखों प्रतियों में एंजाइमेटिक रूप से प्रवर्धित (amplify) करने के लिए किया जाता है।
$PCR$ के $3$ चरण हैं:
$(i)$ विकृतीकरण (Denaturation) ($96\,^{\circ}C$ पर): वांछित डबल-स्ट्रैंडेड $DNA$ को सिंगल-स्ट्रैंडेड $DNA$ $(ssDNA)$ में अलग करना।
$(ii)$ एनीलिंग (Annealing) ($55-65\,^{\circ}C$ पर): प्राइमर का $ssDNA$ टेम्पलेट से जुड़ना।
$(iii)$ विस्तार (Extension) ($72\,^{\circ}C$ पर): $Thermus$ $aquaticus$ बैक्टीरिया से प्राप्त Taq $DNA$ पॉलीमरेज़ द्वारा नए $DNA$ स्ट्रैंड का संश्लेषण।
उपयोग: वांछित जीन का प्रवर्धन या जीन क्लोनिंग।
$(b)$ रिस्ट्रिक्शन एंजाइम और $DNA$ - रिस्ट्रिक्शन एंजाइम एंजाइमों का एक समूह है जिसका उपयोग $DNA$ स्ट्रैंड को काटने के लिए किया जाता है। प्रत्येक एंजाइम एक विशिष्ट बेस अनुक्रम को पहचानता है जिसे रिकग्निशन साइट या रिस्ट्रिक्शन साइट कहा जाता है।
$(i)$ वे विदेशी $DNA$ को कोशिका में प्रवेश करने से रोकते हैं और उसे विशिष्ट साइटों पर पचा लेते हैं। ये साइटें आमतौर पर पैलिंड्रोमिक होती हैं।
$(ii)$ वे एंडोन्यूक्लिएज और एक्सोन्यूक्लिएज दोनों प्रकार के होते हैं।
$(iii)$ वे अक्सर चिपचिपे सिरे (sticky ends) उत्पन्न करते हैं। रिस्ट्रिक्शन एंजाइमों को बैक्टीरिया द्वारा वायरल हमलों से बचने के लिए विकसित एक रक्षा तंत्र माना जाता है।
$(c)$ काइटिनेज - काइटिनेज एक हाइड्रोलाइटिक एंजाइम है जो काइटिन में मौजूद ग्लाइकोसिडिक बंधों को तोड़ता है। इसका उपयोग कवक (fungi) की कोशिका भित्ति को तोड़ने के लिए किया जाता है ताकि $DNA$ या अन्य कोशिकीय घटकों का निष्कर्षण आसान हो सके।