(N/A) परिभाषा: बीज प्रसुप्ति वह स्थिति है जिसमें बीज अनुकूल बाहरी परिस्थितियों (नमी,तापमान,ऑक्सीजन) के बावजूद अंकुरित होने में विफल रहते हैं।
व्याख्या: यह स्थिति बाहरी पर्यावरणीय कारकों के बजाय आंतरिक कारकों द्वारा नियंत्रित होती है। बीज एक निश्चित अवधि के लिए विश्राम अवस्था में रहता है।
प्रसुप्ति के कारण:
$1$. अभेद्य और कठोर बीज आवरण।
$2$. $ABA$ (एब्सिसिक एसिड) जैसे अवरोधक रसायनों की उपस्थिति।
$3$. फेनोलिक एसिड और पैरा-एस्कॉर्बिक एसिड की उपस्थिति।
$4$. अपरिपक्व भ्रूण।
प्रसुप्ति दूर करने की विधियाँ:
$1$. यांत्रिक विधि (Scarification): सैंडपेपर से बीज के आवरण को रगड़कर या चाकू से खुरचकर उसे पानी और गैसों के लिए पारगम्य बनाना।
$2$. रासायनिक उपचार: अवरोधकों के प्रभाव को बेअसर करने के लिए $GA_3$ (जिबरेलिक एसिड) या नाइट्रेट्स जैसे रसायनों का उपयोग करना।
$3$. स्तरीकरण (Stratification): बीजों को विशिष्ट कम तापमान की स्थितियों में रखकर प्रसुप्ति तोड़ना।
$4$. पर्यावरणीय हेरफेर: प्रकाश और तापमान की स्थितियों में बदलाव करके अंकुरण को प्रेरित करना।
$5$. प्राकृतिक प्रक्रियाएं: सूक्ष्मजीवों की क्रिया या जानवरों के पाचन तंत्र से गुजरने पर भी बीज का आवरण टूट सकता है।