(N/A) रेडियो तरंगें चालक तारों में आवेशों के त्वरण के कारण उत्पन्न होती हैं। ये तरंगें आमतौर पर $500 \text{ kHz}$ से $1000 \text{ MHz}$ की आवृत्ति सीमा में होती हैं।
रेडियो तरंगों के प्रकार:
$(i)$ $AM$ (एम्प्लिट्यूड मॉड्यूलेशन) बैंड: $530 \text{ kHz}$ से $1710 \text{ kHz}$।
$(ii)$ $SW$ (शॉर्ट वेव) बैंड: आयनमंडल द्वारा परावर्तन के माध्यम से लंबी दूरी के संचार के लिए उपयोग किया जाता है।
$(iii)$ $TV$ प्रसारण: आवृत्तियाँ $54 \text{ MHz}$ से $890 \text{ MHz}$ तक होती हैं।
$(iv)$ $FM$ (फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलेशन) बैंड: $88 \text{ MHz}$ से $108 \text{ MHz}$।
$(v)$ सेलुलर फोन: ध्वनि संचार के लिए $UHF$ (अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी) बैंड का उपयोग करते हैं।
उपयोग: रेडियो तरंगों का मुख्य रूप से रेडियो,टेलीविजन और सेलुलर संचार प्रणालियों में उपयोग किया जाता है।
सारांश:
- तरंगदैर्ध्य सीमा: $0.1 \text{ m}$ से $600 \text{ m}$।
- आवृत्ति सीमा: $500 \text{ kHz}$ से $1000 \text{ MHz}$।
- स्रोत: दोलन परिपथ (oscillating circuits) में त्वरित आवेश।
- आविष्कारक: गुग्लिएल्मो मार्कोनी,$1895$ में।
- गुण: ये परावर्तन और अपवर्तन प्रदर्शित करते हैं।