(N/A) अध्यारोपण का सिद्धांत यह बताता है कि माध्यम में किसी विशेष बिंदु पर,कई तरंगों द्वारा उत्पन्न परिणामी विस्थापन,प्रत्येक तरंग द्वारा व्यक्तिगत रूप से उत्पन्न विस्थापनों का सदिश योग होता है।
व्यतिकरण वह भौतिक घटना है जो तब होती है जब दो या दो से अधिक तरंगें माध्यम में किसी विशेष बिंदु पर एक-दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं,जिससे एक नया तरंग प्रतिरूप बनता है।
व्यतिकरण के दो प्रकार होते हैं:
$(1)$ संपोषी व्यतिकरण (Constructive interference): यह तब होता है जब एक तरंग का श्रृंग दूसरी तरंग के श्रृंग पर अध्यारोपित होता है,या जब एक तरंग का गर्त दूसरी तरंग के गर्त पर अध्यारोपित होता है। इससे परिणामी आयाम में वृद्धि होती है।
$(2)$ विनाशी व्यतिकरण (Destructive interference): यह तब होता है जब एक तरंग का श्रृंग दूसरी तरंग के गर्त पर अध्यारोपित होता है,या जब एक तरंग का गर्त दूसरी तरंग के श्रृंग पर अध्यारोपित होता है। इससे परिणामी आयाम में कमी आती है।