(N/A) द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव बल वे आकर्षण बल हैं जो ध्रुवीय अणुओं (जिनमें स्थायी द्विध्रुव होता है) और अध्रुवीय अणुओं (जिनमें स्थायी द्विध्रुव नहीं होता) के बीच कार्य करते हैं।
निर्माण: जब स्थायी द्विध्रुव वाला एक ध्रुवीय अणु किसी अध्रुवीय अणु के पास आता है,तो यह अध्रुवीय अणु के इलेक्ट्रॉनिक क्लाउड को विकृत कर देता है। इससे पहले से तटस्थ अध्रुवीय अणु में एक द्विध्रुव प्रेरित हो जाता है।
कार्यप्रणाली: ध्रुवीय अणु का स्थायी द्विध्रुव अपने इलेक्ट्रॉनिक क्लाउड को विकृत करके विद्युत रूप से तटस्थ अणु पर द्विध्रुव प्रेरित करता है। परिणामस्वरूप,अध्रुवीय अणु में ध्रुवीयता विकसित हो जाती है,जिससे ध्रुवीय अणु $(AB)$ और प्रेरित द्विध्रुव अणु $(X_2)$ के बीच आकर्षण बल उत्पन्न होते हैं।
विशेषताएं:
- अन्योन्यक्रिया ऊर्जा $1/r^6$ के समानुपाती होती है,जहाँ $r$ दो अणुओं के बीच की दूरी है।
- प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण,स्थायी द्विध्रुव के द्विध्रुव आघूर्ण और विद्युत रूप से तटस्थ अणु की ध्रुवणता (polarisability) पर निर्भर करता है।
- उच्च ध्रुवणता आकर्षण अन्योन्यक्रियाओं की शक्ति को बढ़ाती है।
- ऐसी प्रणालियों में,परिक्षेपण बलों (dispersion forces) और द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाओं का संचयी प्रभाव मौजूद होता है।