गति के संबंध में अरस्तू के विचार में क्या गलती थी?

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(N/A) अरस्तू की मूलभूत गलती यह धारणा थी कि किसी वस्तु को एकसमान गति की अवस्था में बनाए रखने के लिए एक बाहरी बल की आवश्यकता होती है। अरस्तू के अनुसार,यदि कोई वस्तु गति कर रही है,तो उसके वेग को बनाए रखने के लिए उसे किसी बाहरी कारक द्वारा धकेला जाना आवश्यक है। वह घर्षण और वायु प्रतिरोध की भूमिका को समझने में विफल रहे,जो वास्तविक दुनिया में गतिमान वस्तु को रोकने के लिए जिम्मेदार वास्तविक बल हैं। ऐसे प्रतिरोधी बलों की अनुपस्थिति में,न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार,गतिमान वस्तु अनिश्चित काल तक एकसमान वेग से चलती रहेगी।

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