अधिशोषण क्रोमैटोग्राफी क्या है? इसके प्रकार लिखिए।

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(N/A) अधिशोषण क्रोमैटोग्राफी एक ऐसी तकनीक है जो एक उपयुक्त अधिशोषक पर मिश्रण के विभिन्न घटकों के विभेदक अधिशोषण पर आधारित है।
चूंकि कुछ यौगिक दूसरों की तुलना में अधिक मजबूती से अधिशोषित होते हैं,इसलिए वे स्थिर प्रावस्था (stationary phase) के माध्यम से अलग-अलग दरों पर यात्रा करते हैं,जिससे उनका पृथक्करण हो जाता है।
अधिशोषण क्रोमैटोग्राफी के दो मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
$(i)$ कॉलम क्रोमैटोग्राफी
$(ii)$ थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी

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निम्नलिखित में से सही कथनों की पहचान कीजिए:
$(i)$ इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव एक स्थायी प्रभाव है।
$(ii)$ अतिसंयुग्मन (Hyperconjugation) एक अस्थायी प्रभाव है।
$(iii)$ यदि दो द्रवों के क्वथनांकों में अंतर कम हो,तो उन्हें मिश्रण से अलग करने के लिए प्रभाजी आसवन का उपयोग किया जाता है।
$(iv)$ विभिन्न यौगिक एक अधिशोषक पर अलग-अलग सीमा तक अधिशोषित होते हैं।

एक अशुद्ध यौगिक के क्रिस्टलीकरण द्वारा,यदि मातृ द्रव (mother liquor) रंगीन हो जाता है,तो रंग को हटाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

निम्नलिखित कथनों के लिए सत्य या असत्य बताइए:
$(i)$ क्लोरोफॉर्म और एनीलिन के क्वथनांक क्रमशः $334 \ K$ और $457 \ K$ हैं।
$(ii)$ आसवन में एनीलिन के बाद क्लोरोफॉर्म की वाष्प प्राप्त होती है।
$(iii)$ क्लोरोफॉर्म,एनीलिन की तुलना में अधिक वाष्पशील है।

ग्लिसरॉल का शुद्धिकरण किसके द्वारा किया जाता है?

भाप आसवन (Steam distillation) प्रक्रिया का उपयोग निम्नलिखित में से किसे शुद्ध करने के लिए नहीं किया जा सकता है?

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