(N/A) $(i)$ एल्केन में दुर्बल वांडर वाल्स बल होते हैं,इसलिए सामान्य तापमान पर $C_{4}$ तक के एल्केन गैस अवस्था में और $C_{5}$ से $C_{13}$ तक के एल्केन द्रव अवस्था में होते हैं।
$(ii)$ जैसे-जैसे एल्केन का आणविक भार बढ़ता है,वांडर वाल्स बल बढ़ते हैं। इससे क्वथनांक और गलनांक में वृद्धि होती है।
$(iii)$ एल्केन के समावयवियों में शाखाओं की संख्या बढ़ने से अणु गोलाकार आकार ले लेते हैं,जिससे सतह का क्षेत्रफल कम हो जाता है और वांडर वाल्स बल घट जाते हैं,इसलिए क्वथनांक कम हो जाता है।
$(iv)$ एल्केन के समावयवियों में शाखाएं बढ़ने से वे गोलाकार आकार के हो जाते हैं,जिससे क्रिस्टल जालक में उनकी पैकिंग बेहतर हो जाती है और गलनांक में वृद्धि होती है।