(N/A) ऐल्काइन का हाइड्रो-हैलोजनीकरण: ऐल्काइन यौगिक हाइड्रोजन हैलाइड ($HCl$,$HBr$,$HI$) के साथ इलेक्ट्रॉनस्नेही योग अभिक्रियाएँ देते हैं। इस अभिक्रिया में ऐल्काइन में हाइड्रोजन हैलाइड के दो अणु जुड़कर जेम-डाईहैलॉइड बनाते हैं,जिसमें दोनों हैलोजन परमाणु एक ही कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं।
$(b)$ ऐल्काइन का जलयोजन: ऐल्काइन के जलयोजन का अर्थ है जल $(H_{2}O)$ का योग,जो इलेक्ट्रॉनस्नेही योग अभिक्रिया का पालन करता है। इसमें,पहले चरण में मार्कोवनिकोव नियम के अनुसार $H_{2}O$ का इलेक्ट्रॉनस्नेही $H^{+}$ जुड़ता है और अधिक स्थिर कार्बोकैटायन बनाता है। दूसरे चरण में,$OH^{-}$ आयनों के योग से ऐल्कीनोल बनता है,जो बाद में चलावयवता (tautomerization) द्वारा ऐल्डिहाइड या कीटोन में परिवर्तित हो जाता है,जिसमें $>C=O$ समूह होता है।