(N/A) $1$. धनात्मक (bonding) अतिव्यापन: इस प्रकार के अतिव्यापन में,परमाणु ऑर्बिटल्स के अतिव्यापित होने वाले लोब्स का चिह्न (फेज) समान होता है। इससे दो नाभिकों के बीच इलेक्ट्रॉन घनत्व में वृद्धि होती है,जिसके परिणामस्वरूप बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल का निर्माण होता है (उदाहरण: $s+s$ या समान फेज के साथ $p_z+p_z$)।
$2$. ऋणात्मक (antibonding) अतिव्यापन: इस प्रकार के अतिव्यापन में,परमाणु ऑर्बिटल्स के अतिव्यापित होने वाले लोब्स का चिह्न (फेज) विपरीत होता है। इससे दो नाभिकों के बीच इलेक्ट्रॉन घनत्व में कमी आती है,जिसके परिणामस्वरूप एंटीबॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल का निर्माण होता है (उदाहरण: $s-s$ या विपरीत फेज के साथ $p_z-p_z$)।